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ऑटिज्म के उपचार में अभिभावकों की भूमिका अहम (Role of parents is very important in the treatment of autism)

Parents play a crucial role in their children’s development, helping them build skills and gain knowledge. Parenting is a precious experience, but raising a child with Autism Spec…

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admin

Autism Alliance

19 Sept 2024 4 min read
ऑटिज्म के उपचार में अभिभावकों की भूमिका अहम (Role of parents is very important in the treatment of autism)

Quick understanding

Parents play a crucial role in their children’s development, helping them build skills and gain knowledge. Parenting is a precious experience, but raising a child with Autism Spec…

Key takeaways

  • ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के उपचार में अभिभावकों और माता-पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वास्तव में, माता-पिता ही ऑटिज्म प्रभावित बच...
  • डॉ. अतुल मदान ने अपने संबोधन में बताया कि ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो बच्चे के संचार, सामाजिक संपर्क और व्यवहार को प्रभावित करत...
  • इस कार्यक्रम में डॉ. गुरप्रीत सिंह कोचर ने विशेष अतिथि के तौर पर शिरकत की, जो कि एक प्रसिद्ध पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट हैं और बच्चों के न्यूरो...

ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के उपचार में अभिभावकों और माता-पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वास्तव में, माता-पिता ही ऑटिज्म प्रभावित बच्चों के लिए असली थेरेपिस्ट होते हैं। यह बात केयर फॉर ऑटिज्म लुधियाना सेंटर (ग्रीन फील्ड कोचर मार्केट रोड) के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. अतुल मदान ने कही। वे केयर फॉर ऑटिज्म सेंटर में आयोजित पैरेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम में ऑटिज्म प्रभावित बच्चों के माता-पिता और आम लोगों को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. अतुल मदान ने अपने संबोधन में बताया कि ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो बच्चे के संचार, सामाजिक संपर्क और व्यवहार को प्रभावित करता है। यह समस्या सामान्यतः बच्चे के जीवन के पहले तीन साल में ही स्पष्ट हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस स्थिति से निपटने के लिए माता-पिता का प्रशिक्षित होना बेहद जरूरी है, क्योंकि बच्चा अपने अधिकतर समय अपने माता-पिता या अभिभावकों के साथ बिताता है। इसलिए यह आवश्यक है कि माता-पिता को ऑटिज्म के लक्षणों की पहचान, उपचार और बच्चे की देखभाल के लिए आवश्यक तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाए।

इस कार्यक्रम में डॉ. गुरप्रीत सिंह कोचर ने विशेष अतिथि के तौर पर शिरकत की, जो कि एक प्रसिद्ध पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट हैं और बच्चों के न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स के उपचार के माहिर हैं। उन्होंने उपस्थित माता-पिता के सवालों के जवाब देते हुए बताया कि अगर दवाइयाँ सही तरीके से और डॉक्टर की निगरानी में दी जाएं, तो ये बच्चों की हाइपरएक्टिविटी और गुस्से को नियंत्रित करने में काफी मददगार होती हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इससे थेरपी का प्रभाव भी कहीं अधिक सकारात्मक होता है, जिससे बच्चों के सुधार की संभावना बढ़ जाती है।

डॉ. मदान ने आगे बताया कि ऑटिज्म के उपचार में माता-पिता की भूमिका सिर्फ बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बच्चे के सामाजिक विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता को सिखाया जाना चाहिए कि कैसे वे बच्चे की दैनिक गतिविधियों को थेरपी के हिस्से के रूप में शामिल कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, बच्चे के साथ संवाद करने, खेल के माध्यम से सिखाने और उसकी छोटी-छोटी उपलब्धियों को मान्यता देने से बच्चे में आत्मविश्वास और सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है।

डॉ. अतुल मदान ने कहा कि ऑटिज्म के उपचार के लिए प्रोफेशनल चाहे कितने ही कुशल और विशेषज्ञ क्यों न हों, लेकिन माता-पिता का सहयोग न मिलने पर अच्छे परिणाम प्राप्त नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ माता-पिता की देखभाल या केवल प्रोफेशनल्स का उपचार पर्याप्त नहीं है। इसके बजाय, माता-पिता और प्रोफेशनल्स के संयुक्त प्रयास से ही बच्चे के विकास में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान, बड़ी संख्या में माता-पिता और अन्य लोग शामिल हुए और ऑटिज्म के बारे में जानकारी प्राप्त की। अभिभावकों का मानना था कि यह पहली बार है जब उन्होंने देखा है कि ऑटिज्म प्रभावित बच्चों के उपचार से पहले माता-पिता को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस प्रयास को अत्यंत सराहनीय बताते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से ऑटिज्म के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है।

गौरतलब है कि ऑटिज्म बच्चों में होने वाली एक ऐसी स्थिति है जिसका समय पर और सही तरीके से उपचार किया जाए तो बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार की संभावना काफी अधिक होती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑटिज्म के लक्षण बच्चे की डेढ़ साल की उम्र के आसपास ही स्पष्ट होने लगते हैं। इसलिए, 5 साल से कम उम्र में इसका उपचार शुरू करना अनिवार्य है। यदि इस अवस्था में उपचार में देर की जाए, तो स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है, जिससे बच्चे के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में सेंटर हेड सायकोलॉजिस्ट शिनु कोचर और सेंटर कोऑर्डिनेटर मिस ज्योति का अहम योगदान रहा।

Dr. Atul Madaan (Autism Specialist)
MAAP, MBA, MPhil (Clin. Psy), PhD (Psy)
Operational Head & Clinical Psychologist- Care For Autism (CFA)
8383849217
www.autismspecialist.co.in

𝐂𝐀𝐑𝐄 𝐅𝐎𝐑 𝐀𝐔𝐓𝐈𝐒𝐌 (CFA)
One-of-a-Kind Assessment & Remedial Training Centres for Special-needs Children.

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